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Thursday, 13 July 2017

Top 15 Amazing Facts about Lord Shiva Bhagwan in Hindi

भोले  शिव शंकर, महादेव, भोलेनाथ के बारे में 15 रोचक तथ्य, Top 15 Amazing Facts about Lord Shiva Bhagwan in Hindi





आज हम बात करेंगे देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शिव शंकर भगवान, ॐ नम: शिवाय की. यार इनके बारे में क्या बताऊँ ये खुद भगवान है. चलों फिर भी जिन थोड़े-से लोगों को इनके बारे में गुप्त बातों या कुछ सवालों के जवाब नही पता उनको बता ही देता हूँ. So Let’s begin…

1. भगवान शिव का कोई माता-पिता नही है. उन्हें अनादि माना गया है. मतलब, जो हमेशा से था. जिसके जन्म की कोई तिथि नही.


Lord Shiva has no parents. They are considered to be eternal. Meaning, which was always there. No date of birth
2. कथक, भरतनाट्यम करते वक्त भगवान शिव की जो मूर्ति रखी जाती है उसे नटराज कहते है.


Kathak, the idol that Lord Siva is kept in Bharatanatyam is called Nataraja.

3. किसी भी देवी-देवता की टूटी हुई मूर्ति की पूजा नही होती. लेकिन शिवलिंग चाहे कितना भी टूट जाए फिर भी पूजा जाता है.

There is no worship of any statue of Lord Deva Devi. But no matter how much breakage the Shivling can be worshiped
4. हम शिवरात्री इसलिए मनाते है क्योंकि इस दिन शंकर-पार्वती का ब्याह हुआ था.


We celebrate Shivratri because on this day Shankar-Parvati was married.
5. शंकर भगवान की एक बहन भी थी अमावरी. जिसे माता पार्वती की जिद्द पर खुद महादेव ने अपनी माया से बनाया था.

There was also a sister of Shankar Bhagwan who was Amavasya. The goddess Parvati, who had herself created Mahadeva with her own delusion,
6. भगवान शिव और माता पार्वती का 1 ही पुत्र था. जिसका नाम था कार्तिकेय. गणेश भगवान तो मां पार्वती ने अपने उबटन (शरीर पर लगे लेप) से बनाए थे.


Lord Shiva and mother Parvati had only one son. Whose name was Kartikeya Lord Ganesha was made by Mother Parvati with her rubbish (body lip).
7. भगवान शिव ने गणेश जी का सिर इसलिए काटा था क्योकिं गणेश ने शिव को पार्वती से मिलने नही दिया था. उनकी मां पार्वती ने ऐसा करने के लिए बोला था.


Lord Shiva had cut the head of Ganesh so that Ganesh had not given Shiva to meet Parvati. His mother Parvati spoke to do this.
8. भोले बाबा ने तांडव करने के बाद सनकादि के लिए चौदह बार डमरू बजाया था. जिससे माहेश्वर सूत्र यानि संस्कृत व्याकरण का आधार प्रकट हुआ था.


Bhole Baba had played Dumur for fourteen times for Sunakadi after tandava. This led to the formation of Maheshwar Sutra i.e the Sanskrit grammar.

9. शंकर भगवान पर कभी भी केतकी का फुल नही चढ़ाया जाता. क्योंकि यह ब्रह्मा जी के झूठ का गवाह बना था.


Shankar Bhagwan is never offered any kind of Ketu. Because it was the witness of Brahma ji's lie.
10. शिवलिंग पर बेलपत्र तो लगभग सभी चढ़ाते है. लेकिन इसके लिए भी एक ख़ास सावधानी बरतनी पड़ती है कि बिना जल के बेलपत्र नही चढ़ाया जा सकता.

On the shiveling, balpatra is almost all offered. But it also requires a special caution that no water can be donated.
11. शंकर भगवान और शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल नही चढ़ाया जाता. क्योकिं शिव जी ने शंखचूड़ को अपने त्रिशूल से भस्म कर दिया था. आपको बता दें, शंखचूड़ की हड्डियों से ही शंख बना था.

Shankar Bhagwan and Shivalinga are never offered water to conch shells. Because Shiva ji had destroyed the shankhachur with his trident. Let me tell you, conch shells were made from bone.
12. भगवान शिव के गले में जो सांप लिपटा रहता है उसका नाम है वासुकि. यह शेषनाग के बाद नागों का दूसरा राजा था. भगवान शिव ने खुश होकर इसे गले में डालने का वरदान दिया था.
The name of the snake wrapped in the throat of Lord Shiva is Vasukhi. It was the second king of the serpent after Sheshnag. Lord Shiva was pleased and gave it a boon to put it in the neck.
13. चंद्रमा को भगवान शिव की जटाओं में रहने का वरदान मिला हुआ है.

The moon is a boon to live in Lord Shiva's hair.
14. जिस बाघ की खाल को भगवान शिव पहनते है उस बाघ को उन्होनें खुद अपने हाथों से मारा था.

The tiger that wears Lord Shiva on the skin of the tiger, he had himself hit it with his own hands.
15. नंदी, जो शंकर भगवान का वाहन और उसके सभी गणों में सबसे ऊपर भी है. वह असल में शिलाद ऋषि को वरदान में प्राप्त पुत्र था. जो बाद में कठोर तप के कारण नंदी बना था.

Nandi, which is also the Shankar God's vehicle and the top of all of his Ganas. He was originally the son of Shilad Rishi in the boon. Which was later made of Nandi due to harsh tenacity.